भारत सरकार ने SARTHAK‑PDS (सार्थक सार्वजनिक वितरण प्रणाली) योजना के विस्तार को स्वीकृति दे दी है, जिसमें केंद्र से 25,530 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह निर्णय 16वीं वित्त आयोग चक्र के तहत अगले पाँच वर्षों के लिए किया गया है।
कैबिनेट ने इस योजना को पाँच साल तक जारी रखने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन मंजूर कर दिए हैं, जिससे लाभार्थियों को सस्ते दर पर अनाज और जीवन यापन की आवश्यक वस्तुएँ मिलती रहेंगी। योजना का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करना, कर्ज़ मुक्त करना और गरीब वर्ग की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस विस्तार से न केवल मौजूदा लाभार्थी वर्ग को स्थिरता मिलेगी, बल्कि नए पात्र परिवारों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त, योजना के कार्यान्वयन में डिजिटल भुगतान और टोकन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि होगी।
प्रभाव और महत्त्व
SARTHAK‑PDS के विस्तार से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। 25,530 करोड़ रुपये की केंद्रिय निधि से अनाज की कीमतों में स्थिरता आएगी और महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, डिजिटल तकनीकों के प्रयोग से भ्रष्टाचार में कमी और वितरण प्रक्रिया की निगरानी बेहतर होगी, जिससे सरकार की सामाजिक कल्याण नीतियों में भरोसा बढ़ेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: SARTHAK‑PDS योजना के तहत किन-किन वस्तुओं की आपूर्ति होगी?
उत्तर: इस योजना में मुख्यतः अनाज (गेहूँ, चावल), दालें, तेल, और कुछ आवश्यक सौंदर्य एवं स्वच्छता सामग्री शामिल हैं, जो लाभार्थियों को निर्धारित रिटेल कीमत पर वितरित की जाएँगी।
प्रश्न 2: क्या नई पात्रता मानदंड निर्धारित किए गए हैं?
उत्तर: हाँ, नई पात्रता में आय सीमा, परिवार आकार और पिछड़े वर्ग के संकेतकों को ध्यान में रखते हुए सुधार किए गए हैं, जिससे अधिक गरिब परिवार इस योजना से लाभान्वित हो सकें।





