हॉरमुज जलमार्ग पर इज़राइल-फ़िलिस्तीन तनाव के बीच, भारत ने कच्चे तेल (क्रूड) की खरीद में नई रणनीति अपनाई। चाहे वह ब्रेंट हो या वेस्टर्न, सभी प्रकार के तेल पर भारत ने मुनाफ़े का सौदा किया।
भारत की रणनीतिक खरीद नीति
ऑफ़शोर ब्लॉकेड के कारण तेल की सप्लाई में अनिश्चितता बढ़ी, पर भारत ने इस अवसर को समझा। सऊदी, इराक, इरान, और अमेरिकी शेल्फ़ के तेल को समान दर पर खरीदा, जिससे कीमतों में गिरावट के बावजूद मार्जिन सुरक्षित रहा। प्रमुख भारतीय रिफ़ाइनरी कंपनियों ने दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट्स पर साइन किए, जिससे भविष्य में भी स्थिर सप्लाई सुनिश्चित होगी।
वैश्विक तेल बाजार पर असर
हॉरमुज ब्लॉकेड के कारण यूरोपीय देशों में तेल की कीमतें 4-5% बढ़ी, पर भारत की बड़ी मात्रा में खरीद ने विश्व बाजार में मांग‑आधारित असंतुलन को थोड़ा कम किया। साथ ही, ईरान ने नई अंडरग्राउंड साइट्स से मिसाइलें निकालना शुरू किया, जिससे मध्य‑पूर्व में सुरक्षा माहौल तनावपूर्ण है, पर भारत की व्यापारिक चालें इस क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता लाने की कोशिश करती दिखती हैं।
प्रभाव और महत्व
यह कदम भारत को न सिर्फ तेल की कीमतों में उतार‑चढ़ाव से बचाता है, बल्कि रिफ़ाइनरी उद्योग को स्थिर आय भी प्रदान करता है। रणनीतिक रूप से, भारत ने मध्य‑पूर्व में अपनी आर्थिक पकड़ मजबूत की, जिससे भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ भू‑राजनीतिक संतुलन में भी लाभ मिल सकता है।




