गर्मियों की अनपेक्षित बारिश ने कई जिलों में धान और मक्का के खेतों को पानी में डुबो दिया, जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। फसलें पानी में डूबी होने के कारण किसान तुरंत खरीदी की माँग कर रहे हैं, ताकि उन्हें अतिरिक्त नुकसान से बचाया जा सके।
फसलें जलमग्न, किसान बेचते हैं जल‑भिगोया धान
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रमुख धान‑मक्का उत्पादन क्षेत्रों में लगातार 48 घंटे से अधिक बारिश हुई, जिससे लगभग 2.5 लाख हेक्टेयर फसलें जलमग्न हो गईं। कई किसान अपने खेतों में खड़े हुए धान को पानी से हटाकर फसल बाजार में लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन खरीदारों की कमी और मूल्य गिरावट ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।
सरकारी और निजी खरीदारों से त्वरित कार्रवाई की मांग
किसान संघों ने राज्य के कृषि विभाग और निजी खरीदारों से तत्काल कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि धान को जल्द से जल्द कटाई कर बाजार में लाया नहीं गया तो फसल का क्षरण बढ़ेगा और आर्थिक नुकसान दोगुना हो जाएगा। राज्य सरकार ने आज सुबह घोषणा की कि कृषि मंडियों में धान की खरीद प्रक्रिया को तेज किया जाएगा और अतिरिक्त भंडारण सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
प्रभाव और महत्व
यह बारिश न केवल किसानों की आय को प्रभावित कर रही है, बल्कि राष्ट्रीय धान और मक्का की आपूर्ति श्रृंखला में भी व्यवधान पैदा कर सकती है। यदि समय पर खरीदी नहीं हुई तो बाजार में कमी के कारण कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं और खाद्य सुरक्षा दोनों पर असर पड़ेगा। इसलिए, त्वरित फसल खरीद और उचित मूल्य निर्धारण नीतियों को लागू करना आवश्यक है।


