डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा स्थापित बोर्ड ऑफ़ पीस, जो गाज़ा के पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया था, ने अब तक अपनी आधिकारिक फंड में शून्य डॉलर प्राप्त किए हैं, जबकि कई देशों ने अरबों डॉलर का वादा किया था। यह खुलासा रिपोर्टों के अनुसार, फंड को JPMorgan के एक खाते में जमा किया गया है, जहाँ स्वतंत्र पारदर्शिता की कोई आवश्यकता नहीं है।
बोर्ड के सदस्य देशों ने मिलकर गाज़ा की बुनियादी सुविधाओं के पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर की प्रतिबद्धता जताई, परन्तु वास्तविक धनराशि अभी तक बोर्ड के नाम पर नहीं आई। रिपोर्ट बताती है कि दानराशि एक JPMorgan खाते में जमा हो रही है, जिससे निधियों के उपयोग की निगरानी और पारदर्शिता में कमी आती है। इस कारण अमेरिकी समर्थित फिलिस्तीनी प्रशासन की योजनाएँ भी प्रभावित हो रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी अस्पष्ट वित्तीय व्यवस्था न केवल पुनर्निर्माण कार्यों में देरी का कारण बनेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भरोसे को भी नुकसान पहुंचाएगी। यदि फंड की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो ट्रम्प के इस पहल के दीर्घकालिक लक्ष्य, जैसे कि एक स्थिर फ़िलिस्तीनी प्रशासन स्थापित करना, जोखिम में पड़ सकता है।
प्रभाव और महत्त्व
जैसे ही यह तथ्य सामने आया, कई देशों ने बोर्ड की पारदर्शिता मांगते हुए समीक्षा का आग्रह किया है। फंड की अनुपस्थिति गाज़ा में मानवीय संकट को और बढ़ा सकती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय सहायता के दावे को कमजोर करती है। इस स्थिति से अमेरिकी राजनीति में भी असर पड़ सकता है, जहाँ ट्रम्प की विदेश नीति के फैसलों की समीक्षा फिर से शुरू हो रही है।



