नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने जहां सैकड़ों लोगों की जान ली है, वहीं इसी भीषणता के बीच एक चौंकाने वाली कहानी भी सामने आई है। गोरखपुर के युवक आशुतोष ने बाढ़ की त्रासदी में खुद को बचाते हुए 25 से 30 लोगों की जान बचाई। यही नहीं, वह 24 घंटे तक पहाड़ पर फंसे रहे और फिर सुरक्षित घर लौटे। BBC ने इस हैरान कर देने वाली घटना को विस्तार से कवर किया है।
आशुतोष ने कैसे बचाई लोगों की जान
आशुतोष ने बताया कि जब बाढ़ आई तो उन्होंने अपनी आंखों के सामने लोगों को बहते देखा। पहले तो उन्होंने भागने की सोची, लेकिन फिर उन्होंने खुद को संभाला और बचाव कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने जो कुछ भी देखा, उसे याद करते हुए कहा कि पानी का प्रवाह इतना तेज था कि किसी को पकड़ना भी मुश्किल हो रहा था। आशुतोष ने अपने अनुभव को बतााते हुए कहा कि उन्होंने लोगों को पकड़कर बचाया और खुद भी बाढ़ से जूझते रहे।
24 घंटे की मानसिक और शारीरिक लड़ाई
बचाव कार्य के बाद आशुतोष खुद पहाड़ पर फंस गए। 24 घंटे तक वह वहां रहे जहां न कोई खाना था, न पानी और न ही कोई संपर्क साधन। उन्होंने बताया कि उस दौरान उनका मनोबल टूटने लगा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार जब स्थिति कुछ सुधरी तो वह सुरक्षित नीचे उतरे और गोरखपुर लौट आए। अब वह कहते हैं कि अब वह नेपाल नहीं जाएंगे।
नेपाल बाढ़ का विनाशकारी आंकड़ा
नेपाल में बाढ़ अभी भी जारी है और अब तक 1400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ के 11वें दिन भी मलबे से दो जिंदगियां सुरक्षित निकाली गईं। दार्चुला में लैंडस्लाइड ने भी हालात और बिगाड़ दिए हैं। निचले इलाकों में अलर्ट जारी है और त्रिशूली नदी से तीन और भारतीयों को रेस्क्यू किया गया है। लापता लोगों की उम्मीदें धूमिल पड़ने लगी हैं।
आशुतोष की यह कहानी इस बाढ़ त्रासदी में एक चमकदार उदाहरण है कि इंसानियत कितनी बड़ी हो सकती है। उनके इस साहस और बलिदान की देशभर में प्रशंसा हो रही है।
