उत्तरी भारत के उड़ीस में स्थित चोपता-चंद्रशिला ट्रैकिंग मार्ग पर कचरा जमा होने से पर्यावरणीय危危ता बढ़ी है, और अब जिलाधिकारी ने तुंगनाथ ट्रेक की सफाई हेतु कड़े कदम उठाने का आदेश दिया है।
रूद्रप्रयाग जिले के अधिकारी इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि प्लास्टिक कचरा, धूम्रपान के बुटी और अन्य अपशिष्ट को तुरंत निस्तारित किया जाए, नहीं तो इन पहाड़ों की जैव विविधता और स्थानीय पर्यटन पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने स्थानीय समुदाय, टूर ऑपरेटर और ट्रैकिंग क्लबों से सहयोग की मांग की है, तथा स्वच्छता अभियानों के लिए विशेष टीम गठित की है।
जिलाधिकारी ने कहा, "प्लास्टिक कचरे को नदियों और धारा में न फेंकेँ, न ही ट्रेकिंग मार्ग पर फेंकेँ। हमें इस क्षेत्र को फिर से स्वच्छ बनाना है, ताकि भविष्य की पीढ़ियां इन पहाड़ों का आनंद ले सकें।" इस दिशा में, कचरा संग्रहण बिन, मोबाइल कचरा संग्रह वाहन और पर्यटक सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे।
प्रभाव और महत्व
पर्वतीय क्षेत्रों में कचरा जमा होना न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को घटाता है, बल्कि जल स्रोतों को प्रदूषित कर स्थानीय आबादी की स्वास्थ्य स्थितियों को भी खतरे में डालता है। स्वच्छता उपायों से न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि ट्रेकिंग और एडेवेंचर टूरिज़्म की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई जान मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: तुंगनाथ ट्रेक पर कचरा निस्तारण के लिए कौन-कौन से उपाय किए जा रहे हैं?
उत्तर: प्लास्टिक कचरा संग्रह बिन, मोबाइल कचरा संग्रह वाहन, नियमित सफाई ड्रॉप्स, और स्थानीय लोगों एवं पर्यटकों के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
प्रश्न 2: इस सफाई अभियान में जनता की भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
उत्तर: जिलाधिकारी ने स्थानीय स्कूल, NGOs और ट्रेकिंग क्लबों को सहयोग के लिए आमंत्रित किया है, साथ ही स्वैच्छिक सफाई कार्यक्रमों के लिए समय-सारणी जारी की गई है।
इन कदमों से पहाड़ों को फिर से सांस लेने का अवसर मिलेगा और भविष्य में सतत पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा।




