ममता बनर्जी की टेंशन बढ़ी जब ट्रिनमूल कांग्रेस (TMC) के एक वरिष्ठ नेता ने भाजपा की बड़े स्तर की मीटिंग में भाग लिया और सीधे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। यह कदम पार्टी के भीतर उभरते राजनैतिक उलझनों को उजागर करता है।
बजट 2024 के बाद भाजपा ने पश्चिम बंगाल में कई रणनीतिक बैठकों का आयोजन किया, जिसमें कल्याणी, सिलीगुड़ी और अन्य जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ट्रिनमूल के कई विधायक भी उपस्थित रहे। इस दौरान TMC के एक नेता, जो अक्सर शहीद परिवारों के मुद्दों पर सक्रिय रहा है, ने भाजपा के प्रमुख सांसद सौमित्र खान की 'पाला बदलने' की टिप्पणी को सुनते ही पार्टी के भीतर अपने झुके हुए राजनैतिक रुख को बदलते हुए भागीदारी की पहल की।
साथ ही, भाजपा के इस कदम को लेकर AAP जैसे संभावित गठबंधन की अफवाहें भी तेज हो गई हैं। कई TMC सांसद, जिन्होंने पिछले चुनाव में सत्ता खो दी, अब भाजपा से संपर्क साध रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की लहर तेज़ हो रही है। इन घटनाओं ने ममता बनर्जी को गंभीर निर्णय लेने पर मजबूर कर दिया है, क्योंकि पार्टी के अंदरूनी दबाव बढ़ता दिख रहा है।
प्रभाव और महत्व
यदि TMC के अधिक विधायक और सांसद भाजपा के साथ मिलकर गठबंधन बनाते हैं, तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना है। यह न केवल राज्य की आगामी विधानसभा चुनावों को प्रभावित करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कांग्रेस की स्थिति को कमजोर कर सकता है। साथ ही, इस बदलते परिदृश्य से भाजपा को राज्य में नई जड़ें जमाने और विपक्षी दलों के बीच फूट पैदा करने का मौका मिल सकता है।



