अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ नाराजगी की आवाज़ मज़बूत हो रही है। यूनाइटेड नेशंस के एक प्रतिनिधि ने पाकिस्तान को लक्षित करते हुए उसे 'हजारों चाक मारे वाले भारत' कहा और उसके आतंकवादी गतिविधियों पर सवाल उठाए। इस दौरान भारत ने कहा कि वह सीमा पर आतंक के खिलाफ अपने अधिकार के तौर पर कड़ाई कर सकता है।
इस आतंकवाद के मुद्दे पर यूएन प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियां भारत के साथ सीमा से लेकर पूरे क्षेत्र में खतरा बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होना चाहिए, न कि इसे बेवास्ता करना। भारतीय प्रतिनिधि ने इसके जवाब में कहा कि उनकी देश सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में तैयार रहता है।
इस संगठन ने यूएन में एक प्रतिवेदन पर चर्चा की है जिस में आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ कदम उठाने का आह्वान किया गया है। साथ ही, इस मुद्दे पर विश्व स्वास्थ्य सभ और अंतर्राष्ट्रीय गुप्तानुभव समिति की भी चर्चा हुई है।
प्रभाव और महत्व
इस आतंकवाद के मुद्दे ने आंतरिक नीति और बाह्य संबंधों को प्रभावित किया है। भारत की सरकार ने सीमा पर आतंकवाद के खिलाफ कड़ाकर्ता की घोषणा की है और उसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से इसका समर्थन मांगा है। इसके बेहतरीन प्रभाव से आतंकवादी गतिविधियों पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है और पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने के लिए मजबूर किया जा सकता है।




