भारतीय खेल जगत ने एक बड़ी क्षति झेली है। 79 वर्ष की आयु में दिल्ली में व veteran खेल प्रशासक एवं भारत के प्रथम शूटर स्वर्ण पदकधारी रणधीर सिंह का निधन हो गया।
रणधीर सिंह ने 1966 के एशियाई खेलों में शूटरिंग में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रचा। इसके बाद उन्होंने खेल प्रशासन में कई दशकों तक सेवा की, भारतीय ओलंपिक समिति (IOC) के सदस्य, अंतर्राष्ट्रीय शूटरिंग फेडरेशन (ISSF) के प्रमुख और भारत एथलेटिक्स फेडरेशन के चेयरमैन के रूप में कार्य किया। उनकी दूरदर्शी नेतृत्व शैली ने कई खेलों में भारत को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया।
सांसदों, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने उनके जीवन और करियर को श्रद्धांजलि देने के लिए सोशल मीडिया पर श्रद्धा व्यक्त की। कई प्रमुख खेल संस्थानों ने उनके योगदान को सलाम किया और उनके नाम पर स्कॉलरशिप तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की।
प्रभाव और महत्त्व
रणधीर सिंह के निधन से भारतीय खेल प्रशासन में एक अनुभवी रणनीतिकार की कमी महसूस होगी। उन्होंने भारतीय शूटरिंग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मुख्य भूमिका निभाई और कई युवा एथलीटों को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर चमकने का अवसर दिया। उनका कार्यकाल खेल नीति, बुनियादी ढाँचा विकास और एथलीट कल्याण में कई सुधार लाया, जिससे भविष्य की पीढ़ियों को लाभ मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: रणधीर सिंह ने किन प्रमुख पदों पर कार्य किया?
उत्तर: उन्होंने भारतीय ओलंपिक समिति के सदस्य, अंतर्राष्ट्रीय शूटरिंग फेडरेशन (ISSF) के प्रमुख, भारत एथलेटिक्स फेडरेशन के चेयरमैन और कई राष्ट्रीय खेल संगठनों में अध्यक्षता की।
प्रश्न 2: उनके योगदान को याद करने के लिए क्या विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं?
उत्तर: कई खेल संस्थानों ने उनके नाम पर स्कॉलरशिप, वार्षिक स्मृति प्रतियोगिताएँ और प्रशिक्षण शिविरों की योजना बनाई है; साथ ही, दिल्ली में उनका शोक संवेदनाओं का समागम भी आयोजित किया गया।
रणधीर सिंह के अद्वितीय योगदान को याद रखते हुए, भारतीय खेल जगत उनके सपनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।



