कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को 28 मई को बुलाई गई कैबिनेट ब्रेकफास्ट मीटिंग में इस्तीफा देने की मांग के जवाब में कांग्रेस ने एक बड़ा कदम उठाया – उन्हें राज्यसभा का ऑफर दिया गया। इस निर्णय ने राजनीतिक परिदृश्य को हिला कर रख दिया।
बैठक में क्या हुआ?
कर्नाटक कांग्रेस ने सभी आकस्मिक राजनैतिक सुझावों को खारिज कर दिया और सिद्धारमैया को सीएम पद से हटाने की बजाय उन्हें राज्यसभा में बिठाने का प्रस्ताव रखा। पार्टी ने ओबीसी चेहरा को 2029 तक बड़े रोल के लिए तैयार किया, जबकि डीकेएस (ड्रैगन केस्ट) के लिए रास्ता साफ करने की बात भी कही।
राज्यसभा ऑफर के पीछे की रणनीति
कांग्रेस का मानना है कि सिद्धारमैया को राज्यसभा में भेजने से पार्टी को कर्नाटक में एक मजबूत राष्ट्रीय नेता मिलेगा और साथ ही स्थानीय स्तर पर नई पीढ़ी को मंच मिलेगा। इस कदम से पार्टी के भीतर सत्ता संरचना में संतुलन बना रहेगी और आगामी चुनावों में वोट बैंक को मजबूती मिलेगी।
प्रभाव और महत्त्व
यह निर्णय कर्नाटक की राज्य राजनीति में बड़ी हलचल मचाएगा। यदि सिद्धारमैया राज्यसभा में प्रवेश करते हैं, तो कर्नाटक में नई नेतृत्व शक्ति उभरेगी, जिससे कांग्रेस के भीतर गठबंधन और गठजोड़ की संभावनाएँ बढ़ेंगी। साथ ही, यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की रणनीतिक पुनर्संरचना को भी दर्शाता है।



