यूरोप को इस साल अभूतपूर्व हीट वेव ने घेर रखा है, जबकि भारत में जैसे‑जैसे तापमान बढ़ता है, एसी का प्रचलन आसान हो जाता है। यूरोप में एसी लगाने पर कड़े नियम लागू हैं, जिससे लोग गर्मी से बचने के लिए वैकल्पिक उपाय खोज रहे हैं।
हीट वेव की मार और नियमों की पाबंदी
फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन सहित 16 देशों में रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया है; फ्रांस में ही 1,000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। इस तीव्र गर्मी के कारण कई शहरों की सड़कों और रेल पटरियों में पिघलाव देखा गया। हालांकि भारत में एसी की बढ़ती मांग के साथ नियमों में ढील है, वहीं यूरोप में ऊर्जा बचत और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर एसी स्थापित करने पर प्रतिबंध है। कई देशों में एसी की शक्ति सीमा, ऊर्जा दक्षता मानक और इंस्टॉलेशन पर परमिट आवश्यक है।
लोगों के पास क्या विकल्प?
एसी नहीं चलाने की वजह से यूरोप के नागरिकों ने पंखे, ठंडे शावर और सार्वजनिक ठंडे केंद्रों का सहारा लिया है। कुछ शहरों ने अस्थायी जलभरी फव्वारे और शीतलक कक्ष स्थापित किए हैं। फिर भी, तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुँचने पर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहा है, जिससे अस्पतालों में हीट‑स्ट्रोक के मामलों में इजाफा देखा जा रहा है।
प्रभाव और महत्त्व
यूरोप में एसी पर प्रतिबंध न केवल व्यक्तिगत आराम को प्रभावित कर रहा है, बल्कि ऊर्जा मांग, जल संसाधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति पर भी असर डाल रहा है। यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने और ऊर्जा‑सुरक्षित समाधान विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। भारत में एसी की बढ़ती मांग के साथ समान नियम बनाना भविष्य में ऊर्जा संकट को रोकने में मददगार हो सकता है।



