जुलाई 1978 में आयरलैंड के केनमारे में रहने वाली एलेइडा मारिया एंडर्सके कपर्समा, जिसे लेइडी के नाम से जाना जाता था, अचानक गायब हो गई। नई साक्ष्य के अनुसार, वह उत्तर कोरिया में अपहरण कर जासूस बनाकर काम कर रही हो सकती है।
मुख्य समाचार
लेइडी ने अपने ब्रिटिश बॉयफ्रेंड निक के साथ एक साइड ट्रिप पर जाने की योजना बनाई थी, जब उनका अचानक लुप्त होना सभी को चौंका गया। हालिया दस्तावेज़ और गुप्त-फ़ाइलों में दिखाया गया है कि उनके गायब होने के बाद उन्हें उत्तर कोरिया के गुप्त एजेंट के रूप में प्रशिक्षित किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि वह 1980 के दशक में कई अंतरराष्ट्रीय जासूसी अभियानों में शामिल रही होंगी।
इस नई रिपोर्ट को तैयार करने वाले पत्रकारों ने कई पूर्व-उत्तरी कोरियाई दूतावास कर्मचारियों और एंटी-टेररिस्ट एजेंसियों के साथ साक्षात्कार किए। उन्होंने बताया कि लेइडी को 'ऑपरेशन डॉन्गह्वा' नामक एक गुप्त मिशन में शामिल किया गया था, जिसमें यूरोप के कई प्रमुख राजनयिकों की निगरानी शामिल थी।
प्रभाव और महत्व
यदि यह सच्चाई सिद्ध होती है, तो यह न केवल 1970 के दशक के एक लापता मामले को हल करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जासूसी के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ देगा। इस खुलासे से उत्तर कोरिया की गुप्त ऑपरेशनों की परतें और भी स्पष्ट होंगी, और कई देशों की सुरक्षा एजेंसियों को अपनी रणनीतियों को पुनः मूल्यांकन करना पड़ेगा।
लेइडी के परिवार के लिए यह खबर द्विआधारी भावना लाती है—एक ओर यह आशा कि उनका प्रियजना अब जीवित है, तो दूसरी ओर वह गुप्त एजेंट के रूप में अपने जीवन की अंधेरी सच्चाई को स्वीकार करना पड़ेगा।




