भारत सरकार ने 94 राफेल फाइटर जेट्स का निर्माण भारत में करने का निर्णय लिया है, जिससे अब खरीद प्रक्रिया में कोई बिचौलिया नहीं रहेगा। यह कदम फ्रांस के साथ सीधे डील को अंतिम रूप देता है, जो भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।
डील की मुख्य बातें
फ्रांस को पहले ही 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिये लेटर ऑफ रिक्वेस्ट भेजा जा चुका है, जिसमें 94 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। एयर फ़ोर्स के चीफ़ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने इस संबंध में फ्रांस का दौरा किया और डिमांड लेटर प्रस्तुत किया, जबकि इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
राफेल जेट्स को भारतीय निर्माताओं द्वारा ब्रह्मोस एंटी‑टॉरपीडो सिस्टम से लैस किया जाएगा, जिससे भारत की वायुसेना को उच्च स्तरीय स्टेल्थ और प्रॉक्सी‑बॉम्ब क्षमताएं मिलेंगी। इस परियोजना में तकनीकी ट्रांसफर, स्थानीय सामग्री का उपयोग और सैकड़ों कुशल कर्मियों को प्रशिक्षण देना शामिल है।
प्रभाव और महत्त्व
यह डील भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को गहरा करेगी और भारतीय रक्षा उद्योग को स्वायत्तता की ओर एक बड़ा कदम प्रदान करेगी। 94 जेट्स का स्थानीय उत्पादन न केवल रोजगार सृजन करेगा, बल्कि भारत को भविष्य में खुद के लिए उन्नत लड़ाकू विमान विकसित करने की नींव भी रखेगा। साथ ही, यह कदम भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करेगा, क्योंकि अब कोई मध्यस्थ नहीं रहेगा और सभी तकनीकी व वित्तीय लेन‑देनों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
FAQs
प्रश्न 1: राफेल जेट्स के भारत में उत्पादन की अनुमानित समयसीमा क्या है?
उत्तर: वर्तमान योजना के अनुसार, 2027 तक 94 राफेल जेट्स का उत्पादन पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें प्रारम्भिक दो‑तीन साल में उत्पादन सुविधा की स्थापना और तकनीकी ट्रांसफर शामिल होगा।
प्रश्न 2: क्या भारतीय वायुसेना के लिए मौजूदा राफेल डिलीवरी में कोई बदलाव होगा?
उत्तर: नहीं, 114 राफेल विमानों की कुल डिलीवरी योजना समान रहेगी; केवल 94 विमानों का निर्माण भारत में होगा, जबकि शेष 20 विमानों का उत्पादन फ्रांस में जारी रहेगा।




