असम विधानसभा ने इस सप्ताह यूनीफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल को पारित किया, जिससे बहुविवाह पर सात साल तक की जेल और लिव‑इन रिश्तों के लिए आधिकारिक रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो गया। यह राज्य उत्तराखंड और गुजरात के बाद तीसरा बन गया जिसने यूसीसी को लागू करने का कदम उठाया।
बिल में बहुविवाह को ‘अवैध’ घोषित कर उसे सजा के दायरे में लाया गया, जबकि लिव‑इन कूपलों को राज्य के रजिस्टर में दर्ज कराना आवश्यक किया गया। सरकार का कहना है कि यह कदम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा, बच्चों के कल्याण और सामाजिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए है। विपक्षी दलों ने इसे चुनावी रणनीति और अस्मिता‑विरोधी सियासी चाल बताकर आलोचना की है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बराला ने बताया कि 2028 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने के लक्ष्य में यूसीसी का योगदान महत्वपूर्ण माना गया है। उन्होंने कहा कि कानूनी स्पष्टता निवेशकों को आकर्षित करेगी और सामाजिक असमानताओं को घटाएगी।
प्रभाव और महत्व
UCC के लागू होने से असम में सामाजिक संरचना में बदलाव की उम्मीद है। बहुविवाहियों को सजा मिलने से उनके अधिकारों की रक्षा का दावा किया जा रहा है, परन्तु कई सामाजिक संगठनों ने कहा है कि यह कदम व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रतिबंध हो सकता है। लिव‑इन कूपलों को रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता से संपत्ति, उत्तराधिकार और बच्चों के अधिकारों में स्पष्टता आएगी, परन्तु यह प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्रों में लागू करने में चुनौतियों का सामना कर सकती है।
FAQ
प्रश्न: UCC के तहत लिव‑इन रिश्ते के लिए रजिस्ट्रेशन कैसे किया जाएगा?
उत्तर: राज्य सामाजिक कल्याण विभाग के तहत एक ऑनलाइन पोर्टल खोल रहा है जहाँ दोनों पक्षों को पहचान प्रमाण, आय प्रमाण और रहने का पता देना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद उन्हें कानूनी प्रमाणपत्र मिलेगा, जिससे संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में स्पष्टता होगी।
प्रश्न: बहुविवाह पर 7 साल की सजा का कानूनी आधार क्या है?
उत्तर: यूनीफ़ॉर्म सिविल कोड के अनुच्छेद 12 के तहत बहुविवाह को ‘अवैध विवाह’ माना गया है और इसे दंडनीय अपराध घोषित किया गया है, जिससे दोषी को अधिकतम सात साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
असम में यूसीसी का कार्यान्वयन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में नई बहसें छेड़ रहा है, और इसका दीर्घकालिक असर अभी स्पष्ट नहीं है।




