आयरनाचल के एक दूरस्थ जंगल में 110 साल के बाद लम्बी‑पूँछ वाले डस्कहॉकर (Long‑tailed Duskhawker) ड्रैगनफ़्लाई की दुर्लभ खोज हुई है। यह प्रजाति 1914 में भारत में आखिरी बार दर्ज हुई थी, और अब 600 किमी पूर्व में फिर से मिली है।
मुख्य समाचार
प्रतिवेदन के अनुसार, इसकी पहचान नॉर्थ ईस्टर्न आर्क्टिक इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने की, जो एक वन्यजीव सर्वेक्षण के दौरान इसकी नज़र में आए। यह ड्रैगनफ़्लाई अपनी लंबी पूँछ और धुंधले शाम के समय सक्रिय रहने की आदत से प्रसिद्ध है, और इस प्रकार की खोज बायोडायवर्सिटी के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पहले 2014 में इस प्रजाति को उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में देखा गया था, परन्तु आयरनाचल में इसकी उपस्थिति पहले कभी दर्ज नहीं थी। शोधकर्ता मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन और आवासीय क्षेत्रों के बदलाव ने इस प्रजाति को नई जगहों की ओर धकेला हो सकता है।
प्रभाव और महत्व
यह खोज भारतीय इकोसिस्टम की समृद्धि को फिर से उजागर करती है और स्थानीय संरक्षण नीतियों को मजबूती प्रदान करती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी दुर्लभ प्रजातियों की पुनः प्रकटता पर्यावरणीय स्वास्थ्य के संकेतक के रूप में काम कर सकती है, जिससे संरक्षण प्रयासों में नई दिशा मिलती है।
निष्कर्ष
ड्रैगनफ़्लाई की यह पुनराविष्कार न केवल विज्ञान जगत को उत्साहित करती है, बल्कि आयरनाचल में जैव विविधता के संरक्षण के लिए एक नई आशा की किरन भी लेकर आती है।




