तमिलनाडु के ग्रामीण क्षेत्रों में हर मोफुसिल बस के ड्राइवर के स्पीकर पर इलायराजा की धुनें गूँजती हैं, जो उनके सफ़र को संगीत से भर देती हैं। आज हम इस अनकहे संबंध की जड़ें और 50 साल की विरासत को उजागर करते हैं।
इलायराजा का संगीत क्यों? – ड्राइवरों की पसंद का विज्ञान
स्थानीय ड्राइवर बताते हैं कि इलायराजा की रागनात्मक रचनाएँ मन को शांत करती हैं और लम्बी दूरी के थकान को कम करती हैं। उनका संगीत अक्सर ‘सुरभि’, ‘அமைதி’ जैसे शांति‑भरे टोन पर आधारित होता है, जिससे चालक को ट्रैफ़िक जाम या कठिन मौसम में भी एक स्थिर मनोदशा मिलती है।
मोफुसिल बसों में संगीत का सामाजिक प्रभाव
ब्यापारी और यात्रियों दोनों ने इस प्रवृत्ति को सराहा है; यात्रियों को संगीत सुनते हुए यात्रा अधिक सुखद लगती है, जबकि ड्राइवरों को अपनी पहचान बनाने का एक तरीका मिल जाता है। इलायराजा के गाने अक्सर स्थानीय भाषाओं में अनुकूलित होते हैं, जिससे सांस्कृतिक जुड़ाव और भी गहरा हो जाता है।
प्रभाव और महत्ता
इलायराजा की 50‑वर्षीय यात्रा न केवल भारतीय संगीत को समृद्ध करती है, बल्कि तमिलनाडु की ग्रामीण सामाजिक संरचना में भी एक अभिन्न हिस्सा बन गई है। यह संगीत का असर न केवल मनोरंजन बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, ट्रैफ़िक सुरक्षा और क्षेत्रीय पहचान को भी सुदृढ़ करता है।






