थाईलैंड की अदालत में भारत और पाकिस्तान के बीच एक अनपेक्षित टकराव हुआ, जब दाऊद का राजदार माना जाने वाले ‘मुन्ना झिंगड़ा’ को लेकर दोनों देशों के वकीलों ने एक ही सत्र में अपील दर्ज की। यह मामला भारत में हाल ही में हुए कई आतंकवादी साजिशों से जुड़ा है।
मुन्ना झिंगड़ा कौन है?
मुन्ना झिंगड़ा को भारतीय साक्ष्य विभाग ने ‘दाऊद’ नामक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी नेटवर्क के राजदार के रूप में पहचाना है। जांच में सामने आया कि वह पाकिस्तान के ISI‑समर्थित एक समूह का प्रमुख मध्यस्थ है, जिसने मुंबई, दिल्ली और बांड्रा में कई हमले की योजनाएँ तैयार कीं।
थाई अदालत में भारत‑पाकिस्तान की भिड़ंत
बैंकॉक के उच्च न्यायालय में 15 मार्च को दोनों देशों के वकीलों ने अलग‑अलग दावों के साथ मुकदमा दायर किया। भारत ने झिंगड़ा को ‘आतंकवादी वित्त पोषण’ के आरोप में अंतरराष्ट्रीय जेल में भेजने की मांग की, जबकि पाकिस्तान ने कहा कि वह थाई कानून के तहत ही न्यायसंगत है और उसे किसी भी विदेशी देश में प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता। इस सुनवाई ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया।
प्रभाव और महत्व
यदि झिंगड़ा को सजा दिलाने में सफलता मिलती है, तो यह भारत में ISI‑समर्थित आतंकवादी नेटवर्क को क्षति पहुँचाने वाला एक बड़ा संकेत होगा। साथ ही, थाईलैंड की न्यायिक प्रणाली की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीयता भी परख में आएगी, क्योंकि यह मामला कई देशों के सुरक्षा‑संबंधी हितों को एक साथ जोड़ता है।



