तिरुमाय़ा त्रिपुति देवस्थान (TTD) ने बताया कि 1 मई से 27 मई के बीच 12,43,063 भक्तों ने भगवान वेंकटेश्वर को बाल अर्पित किए। यह अभूतपूर्व संख्या इस पवित्र स्थल पर बाल त्याग की नई ऊँचाई को दर्शाती है।
मुख्य समाचार
TTD के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने के पहले चार हफ्तों में 1.24 मिलियन से अधिक श्रद्धालुओं ने शिरशा काटी, जिससे पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को पार किया गया। बाल त्याग की प्रक्रिया को विशेष रूप से व्यवस्थित किया गया, जहाँ शारीरिक जांच, स्वच्छता और सुरक्षा उपायों को कड़ाई से पालन किया गया।
तिरुमाय़ा के मुख्य द्वार पर स्थित बाल कटाई स्थल में कई ट्रेनों और बस्कों की व्यवस्था की गई, जिससे दूर-दराज़ के भक्तों को भी आसानी से पहुँच मिल सके। इस अवधि में, बालों की कुल मात्रा लगभग 1,80,000 किलोग्राम तक पहुँच गई, जो सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है।
प्रभाव और महत्व
बाल अर्पित करने की परंपरा धार्मिक मान्यताओं में शुद्धता और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। इस बड़े पैमाने पर बाल त्याग न केवल तिरुमाय़ा की आध्यात्मिक आकर्षण को बढ़ाता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान देता है; बालों को पुनर्चक्रण कर विभिन्न उद्योगों में उपयोग किया जाता है। साथ ही, यह प्रवृत्ति सामाजिक एकजुटता और व्यक्तिगत त्याग की भावना को भी उजागर करती है।
FAQ
प्रश्न: बाल त्याग करने की प्रक्रिया में कौन-कौन से सुरक्षा उपाय किए जाते हैं?
उत्तर: TTD ने शारीरिक जांच, एंटीसेप्टिक उपकरण, व्यक्तिगत सुरक्षा कवच और स्वच्छता मानकों का कड़ाई से पालन किया है, जिससे भक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
प्रश्न: बालों का पुनर्चक्रण कैसे किया जाता है?
उत्तर: कटे हुए बालों को संग्रहित कर, उन्हें वाणिज्यिक उद्योगों में हस्तनिर्मित वस्त्र, रजाई और दान हेतु दान किया जाता है; कुछ बालों को वैज्ञानिक अनुसंधान में भी प्रयोग किया जाता है।
तिरुमाय़ा में इस साल की बाल अर्पण लहर ने श्रद्धा, संस्कृति और आर्थिक पहलुओं को एक साथ जोड़ा, जिससे इस पवित्र स्थल की महत्ता और बढ़ी।




