तमिलनाडु के निलगिरीस में एक स्कूलboy को हाथी के अचानक हमले में मार गिराया गया, जिससे स्थानीय समुदाय में गहरी शोक और गुस्सा उत्पन्न हुआ। बच्चे के परिवार को 50 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने की मांग पर छात्रों और गाँव वालों ने बड़े पैमाने पर धरना दिया।
हाथी के हमले की घटनाक्रम
22 मई को निलगिरीस के एक ग्रामीण स्कूल के पास एक जंगली हाथी ने अचानक प्रकट होकर बच्चे को मार गिराया। स्कूल के शिक्षक और स्थानीय वन अधिकारी तुरंत घटना स्थल पर पहुँचे, लेकिन बच्चा बचाया नहीं जा सका। पुलिस ने बताया कि हाथी का मार्गदर्शन करने वाले बाड़े में खराबी के कारण वह गाँव की ओर रुख कर गया।
परिवार और समुदाय की प्रतिक्रिया
शोक में डूबे परिवार ने तुरंत मुआवजे की मांग की, जो उन्होंने 50 लाख रुपये के रूप में तय किया। इसके बाद स्कूल के छात्र, शिक्षक और गाँव के निवासी मिलकर निलगिरीस के मुख्य पुलिस स्टेशन के बाहर शांति मार्च और धरना आयोजित किया। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से तत्काल मुआवजा देने और जंगल में मानव-वन्यजीव टकराव को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की।
प्रभाव और महत्व
यह घटना न केवल एक अनाथ बच्चे की दुखद मौत को दर्शाती है, बल्कि भारत में वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण सुरक्षा के बीच के नाजुक संतुलन को भी उजागर करती है। यदि मुआवजा नहीं दिया गया तो सामाजिक तनाव बढ़ सकता है, जबकि उचित मुआवजा और सुरक्षा उपाय भविष्य में इसी तरह की त्रासदियों को रोक सकते हैं।


