उत्तर प्रदेश के पांच जिलों में नई जेलों का निर्माण शुरू हुआ, साथ ही 17 नगर निगमों को 1725 इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं। यह सभी निर्णय योगी आदित्यनाथ के कैबिनेट ने 24 प्रस्तावों पर मंजूरी दे कर लिये हैं।
मुख्य निर्णयों का विवरण
राज्य सरकार ने अलीगढ़, बहराइच, गाज़ीपुर, लखीमपुर-खेताब और सत्यानारायण में नई जेलों के लिए जमीन और फंड आवंटित किया। इन जेलों की क्षमता 1,500 कैदी होगी और आधुनिक सुरक्षा प्रणाली से लैस होगी। वहीं, लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, उत्तर प्रदेश के 17 नगर निगमों को कुल 1,725 इलेक्ट्रिक बसें प्रदान की जाएंगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन में हरित क्रांति आएगी।
कैबिनेट ने सरकारी वकीलों के मानदेय में 15% वृद्धि की, साथ ही मंथली रिटेनरशिप फीस को नई दर पर फिक्स किया। इसके अतिरिक्त, मक्का खरीद के लिए विशेष MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) तय किया गया, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
प्रभाव और महत्व
नई जेलों से ओवरक्रेडिटेड जेलों की भीड़ घटेगी और न्यायिक प्रक्रिया में सुधार आएगा। इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने से प्रदूषण में कमी, ईंधन खर्च में बचत और यात्रियों को आरामदायक सफर मिलेगा। सरकारी वकीलों के मानदेय में वृद्धि से न्यायिक प्रणाली में गुणवत्ता और प्रेरणा बढ़ेगी, जबकि MSP में मक्का की वृद्धि से कृषि आय में स्थिरता आएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: नई जेलों का निर्माण कब तक पूरा होगा?
उत्तर: सरकारी योजना के अनुसार 2027 तक सभी पाँच जिलों में निर्माण कार्य पूर्ण होने की उम्मीद है।
प्रश्न 2: इलेक्ट्रिक बसों को कौन से शहरों में चलाया जाएगा?
उत्तर: लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, अलigarh‑पुष्कर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली, सुल्तानपुर, बड़ौदा, बणारस, बँसवरा, रायबरेली, भागलपुर, सिद्धार्थनगर और कानपुरवाल में इन बसों को तैनात किया जाएगा।



