लोकसभा में उठाए गए प्रश्न में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से पूछताछ की, कि सीबीएसई का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट कोएम्प्ट (पूर्व में ग्लोबरेना) को क्यों दिया गया, जबकि इस कंपनी को पहले कई विवादों में फँसा देखा गया था। उन्होंने इस मुद्दे की पूरी सच्चाई उजागर करने के लिए ज्यूडिशियल इनक्वायरी और एक विशेष जांच टीम (SIT) का आदेश देने की मांग की।
प्रधानमंत्री के कार्यालय ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट प्रक्रिया पारदर्शी थी और सभी नियामक मानकों का पालन किया गया। लेकिन विपक्षी दल के सदस्यों ने कहा कि कोएम्प्ट की पूर्वीय विवादास्पद रिकॉर्ड—जैसे डेटा सुरक्षा उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताएँ—को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस पर संसद में तीखी बहस छिड़ गई, जहाँ कई सांसदों ने सरकार से त्वरित कार्रवाई का आह्वान किया।
वर्तमान में, लोकसभा के लॉजिस्टिक ऑर्डर (LoP) के तहत इस विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यदि ज्यूडिशियल इनक्वायरी और SIT को मंजूरी मिलती है, तो कोएम्प्ट के पिछले अनुबंध, वित्तीय लेन‑देन और तकनीकी कार्यप्रणाली की गहन जांच की जाएगी, जिससे इस ‘स्कैम’ के पीछे की सच्चाई सामने आ सके।
प्रभाव और महत्त्व
यदि जांच के परिणामस्वरूप कोएम्प्ट को अनुचित लाभ मिलने का प्रमाण मिलता है, तो यह न केवल सीबीएसई की विश्वसनीयता को चोट पहुंचाएगा, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक निधि के दुरुपयोग को लेकर व्यापक विमर्श को भी जन्म देगा। यह कदम सरकार की जवाबदेही को सुदृढ़ करने के साथ‑साथ भविष्य में समान अनुबंधों की प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करेगा।





