सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी को "सेवेज़ नहर" कहकर कड़ी निंदा की और होम सेक्रेटरी के अधीन एक विशेष पैनल का गठन कर 8 हफ्तों में व्यापक सफाई योजना तैयार करने का आदेश दिया। यह कदम दिल्ली‑एनसीआर के जल संकट को हल करने के लिये उठाया गया है।
कोर्ट ने कहा कि यमुना अब "थोड़ी सी जलधारा" से अधिक नहीं बची, जिससे शहर की सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिति गंभीर खतरे में है। पैनल में जल संसाधन विशेषज्ञ, पर्यावरण विज्ञानियों, नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी और केंद्रीय जल मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो जल शोधन, जलाशयों की पुनर्स्थापना और गंदे जल के निपटान के लिए ठोस कदम निर्धारित करेंगे।
पैनल को निर्देश दिया गया है कि वह मौजूदा नालियों, रिटर्न फ्लो और औद्योगिक अपशिष्ट के स्रोतों की पहचान कर, तत्काल कार्यवाही के लिए प्राथमिकता सूची तैयार करे। साथ ही, जल प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त नियमों को लागू करने, दंडात्मक प्रावधानों को सुदृढ़ करने और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देने की रणनीति भी तैयार करनी होगी।
प्रभाव और महत्त्व
यमुना की सफाई से दिल्ली के लाखों नागरिकों को शुद्ध जल उपलब्ध होगा, जलजनित रोगों में कमी आएगी और पर्यावरणीय संतुलन बहाल होगा। यह निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर जल संरक्षण और सतत विकास के लिए एक मिसाल स्थापित करेगा, जिससे अन्य प्रदूषित नदियों के पुनरुद्धार के लिये भी प्रेरणा मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: पैनल को योजना तैयार करने के लिये कितने समय का समय दिया गया है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने पैनल को 8 हफ्तों (56 दिनों) में विस्तृत कार्य योजना तैयार करने का आदेश दिया है।
प्रश्न 2: योजना में किन प्रमुख उपायों को शामिल किया जाएगा?
उत्तर: योजना में जल शोधन संयंत्रों का विस्तार, औद्योगिक अपशिष्ट का उपचार, नालियों का पुनर्निर्माण, सख्त पर्यावरणीय नियम एवं सार्वजनिक जागरूकता अभियान प्रमुख होंगे।





