अंकलांडा, उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर में NEET की परीक्षा में दोबारा बैठने का साहस न होने के कारण 19 वर्षीय अभ्यर्थी आकांक्षा शर्मा ने आत्महत्या कर ली। उसके परिजनों ने बताया कि परिवार ने लगभग 3 लाख रुपये किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन और रिश्तेदारों की मदद से उसकी तैयारी में खर्च किया था।
परिवार का आर्थिक बोझ और दबाव
आकांक्षा के पिता, रमेश शर्मा, ने कहा कि उन्होंने KCC के माध्यम से 2.5 लाख रुपये का ऋण लिया और शेष 50,000 रुपये रिश्तेदारों से उधार लिए। यह राशि छात्रा की निजी ट्यूशन, मॉडल टेस्ट पेपर और ऑनलाइन कोचिंग के लिए उपयोग हुई। पढ़ाई में लगातार असफलता और दोबारा परीक्षा देने की अनिश्चितता ने छात्रा को मानसिक रूप से बहुत हिलाया।
मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा प्रणाली की चुनौतियां
परिवार के अनुसार, आकांक्षा को कोई पेशेवर मानसिक सलाह नहीं मिली। उसके दोस्त और शिक्षक बताते हैं कि वह लगातार तनाव, नींद की कमी और आत्मविश्वास की कमी से जूझ रही थी। यह घटना शिक्षा प्रणाली में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक दबाव को उजागर करती है, जहाँ कई परिवार उच्चतम अंक पाने के लिए भारी ऋण ले लेते हैं।
प्रभाव और महत्व
यह दुखद घटना छात्रों, अभिभावकों और नीति निर्माताओं को यह सोचने पर मजबूर करती है कि कैसे आर्थिक सहायता के साथ साथ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी सुदृढ़ किया जाए। परीक्षा तनाव को कम करने के लिए काउंसलिंग, स्कॉलरशिप और ऋण माफी योजनाओं की आवश्यकता है, ताकि ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।




